चूहा दौड़ या मटकी फोड़ ?

आज की शिक्षा, रोज़गार, राजनीति, घर  हो या आम जिंदगी, आपके अनुसार कैसे होना चाहिए?

अगर हम अपने व्यवहार को खेल के रूप मे देखें तो हमारे पास दो तरह के खेल हैं. एक हुआ चूहा दौड़ जिसमे :

rat race in school के लिए चित्र परिणाम

– एक चूहे को दूसरे चूहे से कोई लेना देना नही है, सभी चूहे अपने तरक्की के लिए ही शामिल हैं.

– अगर इस खेल मे कोई चूहा तेज़ है तो वो दूसरे चूहों के लिए एक ख़तरा है, इसीलिए उसे नीचे गिराने मे बाकी सभी चूहों को फ़ायदा है.

– अगर कोई चूहा घायल हो जाए तो उसके लिए रुखने वाला चूहे को भी हार जाना होगा, बाकी आगे भागने वाले चूहे खुद को ज़्यादा समझदार कहेंगे,

और रुखने वाले को नादान या बेवकूफ़.

– वो चूहे जो दौड़ मे पहले से ही शामिल हैं वे किसी नये चूहे से आगे ही रहेंगे और न उसे आगे आने देंगे.

– यही दौड़ सदियों तक चलती रहेगी क्योंकि नये चूहों ने भी इस दर्दनाक और दृष्टिहीन दौड़ के अलावा कुछ और नही देखा.

– जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ती जाएगी, वैसे वैसे ‘जीतने’ वालों के तुलना मे ‘हारने’ वालों की संख्या और तेज़ी से बढ़ती जाएगी.

 

सोचिए ऐसा खेल हर रोज़ सदियों तक छूह-विद्यालयों मे, छूह-दफ़्तरों मे, और छूहघरों मे खेला जाए तो सबसे आगे आने वाले चूहे कैसे होंगे ?

– बुद्धिमान, शक्तिशाली लेकिन मतलबी चूहे जीतेंगे

– कमज़ोरों पर हँसने वाले या उनको कुचलने वाले चूहों की जनसंख्या फलेगी-फूलेगी

– आज के चूहे अपने से आगे वालों के दबाव मे होकर अपनी खुद के सोच विचार को खो देंगे, इस भीड़ के बँधी बन जाएँगे

– खेल के सभी नियमों को तोड़ने वाला चूहा अगर आगे होगा तो उसे कोई पकड़ नही सकता क्योंकि वो आम चूहों के पहुँच के बाहर है

– अगर नियम तोड़ते हुए पकड़ा गया तो भी फरार होने के काई उपाय हैं क्योंकि नियम बनाने वाले चूहों की भी एक कीमत होती है

– नये नियम फिर ऐसे बनते हैं जिसमे एक बार अगर कोई हारने लगे तो उसका बाद मे जीतना बहुत मुश्किल होगा

संबंधित चित्र

क्या इसीलिए ये शिक्षा ? इतनी मेहनत ? क्या मतलब है इस ज़िंदगी का ?

जहाँ जीतने वाले भी चूहे ही हैं जो अंधे, बहरे, पागल, अहंकारी होकर इधर उधर भाग रहे हैं?

क्या इस चक्रव्यूह का है कोई तोड़ ?

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चूहे दौड़ के इस भीड़ को छोड़,

आओ मिलकर खेलें मटकी फोड़!

______________________________________________dahi handi के लिए चित्र परिणाम मटकी फोड़ के नियम:

– यहाँ कोई आगे पीछे नही जा रहा है; हमे साथ मे मिलकर मटकी फोड़ना होगा…यहाँ सब जीते या सब हारे

– एक मटकी फूटेगा तो सब मे बेटेगा, फिर दूसरी मटकी उससे से भी उपर होगी, उसके लिए और मेहनत लगेगी, फिर तीसरी, ऐसे पूरा समूह आगे जाएगा

– अगर कोई ताकतवर है तो उसके आस पास के सभी का भला होगा. अगर उसको देखकर दूसरे जलेंगे या उसे नीचे दुबाएँगे तो इसमे सबका नुकसान होगा.

इस वजह से ऐसी नकारात्मक सोच धीरे धीरे आगे आने वाले मे कम होती जाएगी.

– अगर कोई कमज़ोर है तो भी थोड़ा कम बल लगा सकता है, या विश्राम कर सकता है.

उसके बदले कोई और कमान संभालेगा. मदद करने वाले को मदद मिल जाने पर परस्पर मदद करने की इच्छा बढ़ेगी.

– वो जो इस खेल मे पहले से ही शामिल हैं वे नये खिलाड़िओं को अपना सारी शक्ति और शिक्षा प्रदान करेंगे और अपने कंधों पर छडाएंगे क्योंकी तभी जाकर आने वाली पीढ़ी और ऊँची मटकियाँ फोड़ेंगी.

– अगर यही सिलसिला दोहराता रहा तो आने वाले समय मे नये चूहे भी कोई और good luck निकालेंगे और नये गुल्लक फोड़ेंगे !

– जैसे जैसे जनसंख्या बढ़ती जाएगी, वैसे वैसे हमारी प्रगती के शिखर भी उपर होते जाएँगे.

                                     शिक्षा एक गैर-शून्य राशि खेल है. (http://asanvigyan.in/asan-vigyan-a-collaborative-non-zero-sum-game-approach-to-science-education/)

अब ऐसे खेल मे सबको जीतने के लिए ….

– एक दूसरे से नफ़रत या दुश्मनी की भावना से उपर निकलना होगा

– एक दूसरे पर भरोसा करना होगा

– सबके अलग अलग मटकियाँ भी होंगी और अलग अलग चुनौतियाँ, आपस मे तुलनात्मक विचार कम करना होगा

– खुलकर मदद करना होगा ताकि अगली पीढ़ी को अच्छे संसार मे प्रवेश कर सखें

– जीतने वाले के कंधे का सहारा लेकर आगे बढ़ेंगे. इससे उनमे भी सकारात्मक चिंतन और समझदारी होगी human pyramid के लिए चित्र परिणाम

हलाकी ऐसा लग सकता है की मटकी फोड़ का सपना काल्पनिक है या ‘पर्फेक्ट’ है, कोई भी समाज पर्फेक्ट नही होता. इसके अपने ही अलग मुश्किलें होंगी.

और ये खेल का विभाजन समाजवाद या पूंजीवाद के दायरे मे नही आता, दोनों आर्थिक व्यवस्था मे चूहा दौड़ और मटकी फोड़ हो सकता है.

हमारी ज़िंदगी मे दोनों तरह के खेल चलते रहते हैं. निर्णय हमारे उपर ही कई की हम कौँसे खेल को हम बढ़ाएँगे, चूहा-दौड़ या मटकी-फोड़ ?

Please comment your views…आपका इस विषय मे क्या विचार है, हम जानना च्चते हैं: Mail to educatorsforequality@gmail.com

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Picture reference:

1)http://www.dailymirror.lk/article/Rat-racing-begins-from-Grade-One-135446.html

2) stevecutts.com

3) http://www.dnaindia.com/locality/mumbai-north/dahisar-corporator-donates-money-collected-during-dahi-handi-celebrations-families-farmers-69337

4) http://www.thehindu.com/news/international/uk-students-hit-upon-formula-for-perfect-human-pyramid/article7123144.ece

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